मंदसौर। मंदसौर पुलिस ने बिहार के छह साइबर ठगों की पकड़ा है। इस सफलता में सबसे बड़ी भूमिका एसपी विनोद कुमार मीना की है। उन्होंने जांच में लगभग ढाई हजार से ज्यादा मोबाइल नंबरों की जांच की। एक-एक का तकनीकी विश्लेषण किया और आरोपितों तक पुलिस पहुंच गई। एक-एक आरोपित की भी एसपी ने लोकेशन ट्रेस की और पुलिस टीम को दिशा-निर्देश देते रहे। पुलिस टीम ने मास्टर माइंड सहित 6 आरोपियों को पकड़ लिया। इस गिरोह के तार विदेशों में बैठकर ठगी करने वालों से भी जुड़े हैं। 150 म्यूल खाते ऐसे भी चिन्हित हुए हैं, जिनमें 34 लाख रुपये जमा हुए थे। अभी जांच जारी है और हो सकता है आगे और भी म्यूल खाते पकड़ में आए।
एसपी विनोद कुमार मीणा ने बताया कि शामगढ़ में आलमगढ़ निवासी युवती ने एक मेट्रोमोनियल साइट पर बायोडाटा व फोटो अपलोड किया। साइबर ठगों ने बायोडाटा से युवती की आर्थिक स्थिति का पता किया और उसे जाल में फसाना शुरु कर दिया। पहले युवती का विश्वास जीता फिर अपने फर्जी घर वालों के फोटो भी युवती को भेजे। खुद को एनआरआई बताकर बात करता रहा। जब युवती उसके प्रेमजाल में फंस गई तो एक दिन युवक ने कहा कि विदेश से एक गिफ्ट भेजा है जो एयरपोर्ट पर कस्टम में रोक लिया है। इसमें कुछ रुपये जमा कराने होंगे। विश्वास कर युवक के बताए एकाउंट में रुपये भेज दिए। इसके दो बाद भी युवती को काल आया जिसमें कस्टम अधिकारी बताते हुए कहा कि पार्सल से ड्रग्स है। युवती ने डरकर अपने आनलाइन प्रेमी से संपर्क किया। ठग ने अपने साथियों के साथ मिलकर मदद के बहाने अलग-अलग खातों में 7.50 लाख रुपये डलवा ली। इसके बाद प्रेमी ने संपर्क करना ही बंद कर दिया। युवती को भी ठगी का अंदेशा हुआ तो स्वजन के साथ शामगढ़ थाने पहुंची। यहां से पुलिस ने जांच शुरु की। एसपी मीना ने इसे लीड किया और करीब ढाई माह तक चली जांच के बाद पांच आरोपितों को जयपुर से व मास्टर माइंड को बिहार से गिरफ्तार किया।
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प्रारंभिक जांच में पता चला है कि मास्टर माइंड टोनी कुमार पुत्र संजयराम निवासी छपिया गोपालगंज (बिहार) पूरी टीम को एक टूल किट उपलब्ध कराता था। इस किट में मोबाइल, सिम कार्ड आदि सामग्री होती थी। इससे सीडीएम बैंक एकाउंट जनरेट हो जाता था और इन्हीं खातों में ठगी का खेल चलता था। थोड़े-थोड़े दिन में यह टूल किट बदल दी जाती थी। पुलिस ने इस मामले में अब तक देशभर में 150 बैंक खाते सीज कराए है जिनमें 34 लाख रुपये जमा है। आरोपितों ने लगभग 11 करोड़ रुपये की ठगी की जानकारी दी है।
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गिरोह का काम करने का तरीका बंटा हुआ है। एक टीम म्यूल खातों व सिम की व्यवस्था करती थी। वहीं दूसरी टीम कालिंग कर लोगों को ठगती थी तो तीसरी टीम म्यूल खातों में आने वाले रुपयों को तत्काल निकालकर दूसरे खातों में भेजते थे। गिरोह में सभी लोग 12वीं पास या स्नातक है। अधिकांश म्यूल अकाउंट व मोबाइल सिम आगरा, फिरोजाबाद, दिल्ली एवं बिहार राज्य से लिए थे वहीं कुछ मोबाइल सिम एवं म्यूल अकाउंट भोपाल से भी लिए गए है।
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पुलिस को जानकारी लगने और बैंक खाते फ्रीज कराने का पता चलते ही गिरोह मोबाइल फोन, सिम, बैंक पासबुक, एटीएम आदि सब नष्ट कर देते थे। अगली ठगी के लिए अलग से मोबाइल, सिम, म्यूल अकाउंटस का इंतजाम करते हैं। प्रत्येक मोबाइल फोन के पीछे एक स्लिप होती थी जिसमें संबंधित व्यक्ति का नाम व खाता नं. का उल्लेख होता हैं। उस फोन से उसी खाते से संबंधित कार्य करते हैं।
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पुलिस ने अभी तक त्रिलोकी कुमार पुत्र नागेंद्र राऊत, शिवम पुत्र चंदेश्वर प्रसाद, बबलू कुशवाह पुत्र मनीष प्रसाद कुशवाह, गुंजन पुत्र चंद्रश्वर प्रसाद गुप्ता, शशि कुमार पुत्र शंभू प्रसाद कलवार सभी निवासी निवासी भेलाही थाना भेलाही जिला पूर्वी चंपारण (बिहार) व मुख्य सरगना टोनी कुमार पुत्र संजयराम निवासी छपिया गोपालगंज बिहार को गिरफ्तार किया है। इनमें पास से
22 एंड्राइड मोबाइल, 30 मोबाइल सिम, 5 एटीएम कार्ड जब्त किए है।
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-इस पूरे मामले में संतोष की बात यह रही है कि युवती से ठगे गए 8.50 लाख रुपये पूरे रिकवर हो गए है। इसके अलावा इन ठगों को पकड़ने में ढाई हजार से अधिक फोन नंबर की जांच की। तब जाकर आरोपितों तक पहुंचे। 34 लाख रुपये फ्रीज करा चुके हैं। लगभग 11 करोड़ की ठगी आरोपितों ने कबूली है। अभी जांच जारी है।-विनोद कुमार मीना, एसपी











